अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग पर संसद के ऊपरी सदन सीनेट में सुनवाई आरंभ हो चुकी है.
सीनेट में बहुमत प्राप्त रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल मुख्य गवाहों या दस्तावेज़ों को रोकना चाहते हैं जबकि डेमोक्रेट्स का कहना है कि ये पर्दा डालने वाली बात होगी. डेमोक्रेट्स महाभियोग पर सुनवाई संबंधी नियमों में बदलाव चाहते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप पर यूक्रेन के मामले में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग और कांग्रेस को उनके आचरण की जांच करने से रोकने का आरोप है. राष्ट्रपति ट्रंप इन आरोपों से इंकार करते हैं.
सीनेटर्स ने शपथ ली है कि वे निष्पक्ष न्यायाधीशों की तरह कार्य करेंगे.
वे हफ्ते में छह दिन और हर दिन छह घंटे जिरह सुनेंगे. ये सुनवाई यूएस चीफ़ जस्टिस के समक्ष हो रही है.
अमरीकी इतिहास में ये तीसरा मौका है जब किसी राष्ट्रपति को महाभियोग का सामना करना पड़ रहा है और ये स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के ख़िलाफ़ सुनवाई कब तक चलेगी.
बीबीसी के नॉर्थ-अमरीका रिपोर्टर एंथनी ज़र्चर का कहना है कि रिपब्लिकन बहुमत वाले सीनेट में राष्ट्रपति ट्रंप को दोषी ठहराए जाने की संभावना ना के बराबर है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग पर संसद के ऊपरी सदन सीनेट में सुनवाई की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक दलगत रही.
अपने शुरुआती बयान में डेमोक्रेट नेता एडम शिफ़ ने कहा, ''अधिकतर अमरीकियों को नहीं लगता कि सुनवाई निष्पक्ष होगी. उन्हें नहीं लगता कि सीनेट निष्पक्ष होगी. उन्हें लगता है कि नतीजा पहले से तय है.''
उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल इस सुनवाई को ''जितनी जल्दी हो सके, निपटा देना चाहते हैं.''
राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद सुनवाई की अवधि को कम करने की कोशिश करते रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप की लीगल टीम ने इससे पहले सुनवाई को संविधान के साथ खिलवाड़ की ख़तरनाक कोशिश बताते हुए उन्हें फौरन बरी करने की मांग की थी.
रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल ने प्रस्ताव रखा था कि शुरुआती जिरह की अवधि तीन दिन से घटाकर दो दिन कर दी जाए. राष्ट्रपति के वकीलों ने इसका समर्थन किया.
लेकिन सीनेटर्स के साथ एक बैठक के बाद मिच मैककोनेल तीन दिन की अवधि पर राज़ी हो गए.
वहीं डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया कि अमरीका के लोगों को धोखे में रखा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हर किसी बात पर चर्चा करेंगे लेकिन उन्होंने वाकई जो किया है, उस पर कुछ नहीं बोलेंगे.
'ट्रंप दावोस में क्या देखेंगे- सीएनएन या फॉक्स'
वॉशिंगटन में जारी महाभियोग की सुनवाई के केंद्र में यूं तो राष्ट्रपति ट्रंप हैं, लेकिन वो फिलहाल दावोस में वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम में अमरीकी समृद्धि का जश्न मना रहे हैं.
बीबीसी के नॉर्थ अमरीका एडिटर जॉन सोपल का कहना है कि दावोस में ट्रंप अर्थव्यवस्था और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर बात करके ख़ुद को विश्व के एक गंभीर नेता के रूप में दिखाना चाहेंगे.
जॉन सोपल का कहना है कि आप शर्त लगा सकते हैं कि ट्रंप दावोस में क्या देखेंगे- सीएनएन या फॉक्स, लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि महाभियोग की वजह से ट्रंप काफी चिंतित हैं.
यही वजह है कि 5 हज़ार फुट की ऊंचाई वाले दावोस में वो अपने लिए भले ही ऊंचा मुक़ाम तलाश रहे हो, लेकिन वॉशिंगटन की ज़मीन पर क्या हो रहा है, इस पर उनकी पैनी नज़र है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग पर संसद के ऊपरी सदन सीनेट में सुनवाई आरंभ हो चुकी है.
सीनेट में बहुमत प्राप्त रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल मुख्य गवाहों या दस्तावेज़ों को रोकना चाहते हैं जबकि डेमोक्रेट्स का कहना है कि ये पर्दा डालने वाली बात होगी. डेमोक्रेट्स महाभियोग पर सुनवाई संबंधी नियमों में बदलाव चाहते हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप पर यूक्रेन के मामले में अपनी शक्तियों का दुरुपयोग और कांग्रेस को उनके आचरण की जांच करने से रोकने का आरोप है. राष्ट्रपति ट्रंप इन आरोपों से इंकार करते हैं.
सीनेटर्स ने शपथ ली है कि वे निष्पक्ष न्यायाधीशों की तरह कार्य करेंगे.
वे हफ्ते में छह दिन और हर दिन छह घंटे जिरह सुनेंगे. ये सुनवाई यूएस चीफ़ जस्टिस के समक्ष हो रही है.
अमरीकी इतिहास में ये तीसरा मौका है जब किसी राष्ट्रपति को महाभियोग का सामना करना पड़ रहा है और ये स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के ख़िलाफ़ सुनवाई कब तक चलेगी.
बीबीसी के नॉर्थ-अमरीका रिपोर्टर एंथनी ज़र्चर का कहना है कि रिपब्लिकन बहुमत वाले सीनेट में राष्ट्रपति ट्रंप को दोषी ठहराए जाने की संभावना ना के बराबर है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग पर संसद के ऊपरी सदन सीनेट में सुनवाई की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक दलगत रही.
अपने शुरुआती बयान में डेमोक्रेट नेता एडम शिफ़ ने कहा, ''अधिकतर अमरीकियों को नहीं लगता कि सुनवाई निष्पक्ष होगी. उन्हें नहीं लगता कि सीनेट निष्पक्ष होगी. उन्हें लगता है कि नतीजा पहले से तय है.''
उन्होंने कहा कि रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल इस सुनवाई को ''जितनी जल्दी हो सके, निपटा देना चाहते हैं.''
राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सांसद सुनवाई की अवधि को कम करने की कोशिश करते रहे हैं.
राष्ट्रपति ट्रंप की लीगल टीम ने इससे पहले सुनवाई को संविधान के साथ खिलवाड़ की ख़तरनाक कोशिश बताते हुए उन्हें फौरन बरी करने की मांग की थी.
रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल ने प्रस्ताव रखा था कि शुरुआती जिरह की अवधि तीन दिन से घटाकर दो दिन कर दी जाए. राष्ट्रपति के वकीलों ने इसका समर्थन किया.
लेकिन सीनेटर्स के साथ एक बैठक के बाद मिच मैककोनेल तीन दिन की अवधि पर राज़ी हो गए.
वहीं डेमोक्रेट्स ने आरोप लगाया कि अमरीका के लोगों को धोखे में रखा जा रहा है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हर किसी बात पर चर्चा करेंगे लेकिन उन्होंने वाकई जो किया है, उस पर कुछ नहीं बोलेंगे.
Wednesday, January 22, 2020
Thursday, January 9, 2020
बिहार में बीच चौराहे से छात्रा को अगवा कर 'गैंगरेप' का आरोप
बिहार की राजधानी पटना में एक छात्रा के साथ गैंगरेप की घटना सामने आई है. आरोप है कि सोमवार की शाम साढ़े सात बजे पटना के बोरिंग रोड चौराहे पर एक मॉल में खाना खाने गई बीबीए की सेकेंड इयर की छात्रा को पिस्टल की नोक पर डराकर चार लड़कों ने अगवा कर लिया.
वे उसे कार में बिठाकर एक फ्लैट पर ले गए, उसके साथ दुष्कर्म किया, वीडियो बनाया और बाहर बोलने पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर छोड़ दिया.
यह बातें पटना महिला थाने में एक एफ़आईआर रिपोर्ट में दर्ज है. रिपोर्ट के अनुसार लड़की ने यह भी कहा है कि वह किसी तरह जान बचाकर लड़कों के चंगुल से निकल सकी. हॉस्टल आकर अपनी बहन को सारी कहानी सुनाई, फिर दोनों ने साहस करके मुक़दमा दर्ज कराने का फ़ैसला किया.
पटना पुलिस ने लड़की की मेडिकल जांच कराई है. रिपोर्ट आने का इंतज़ार है. अभी तक की कार्रवाई में पुलिस ने चार में से दो लड़कों को गिरफ़्तार किया है. उनसे पूछताछ के आधार पर बाक़ी के बचे दोनों मुख्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.
बीबीसी को पटना की महिला थाना प्रभारी आरती जायसवाल ने बताया, "लड़की की शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 376 डी, 323 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. जिन दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है, उनसे पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे हैं. सीसीटीवी फुटेज और कॉल लोकेशन के आधार पर उन तक पहुंचने की कोशिशें चल चल रही हैं."
एफ़आईआर रिपोर्ट में जिस जगह से लड़की को अगवा करने की बात दर्ज है उसे शहर का दिल कहा जाता है. शहर के बीचों-बीच स्थित पटना का बोरिंग रोड चौराहा.
लड़की ने शिकायत पत्र में कहा है कि वह बोरिंग रोड स्थित जीवी मॉल के एक रेस्टोरेंट में खाने के लिए गई थी. मुख्य अभियुक्तों में से एक वहां पहुंचता है. उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहता है. लड़की मना कर देती है. वहां लड़के से उनकी बहस होती है. वह बिना खाए रेस्टोरेंट से निकल गई. लड़का उसके पीछे -पीछे चला आता है. बाहर निकलने पर पिस्टल सटा कर सामने खड़ी गाड़ी में बैठ जाने को कहता है.
पुलिस को जो सीसीटीवी फुटेज मिले हैं उसमें भी रात के अंधेरे के धुंधलके में दिखता है कि तीन लड़के और लड़की एक गाड़ी में बैठते हैं. एक लड़का लड़की के एकदम क़रीब है. एक और लड़का पहले से कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा रहता है.
सीसीटीवी फुटेज में यह भी दिखता है कि सबके बैठ जाने के बाद भी कार स्टार्ट नहीं होती है. मॉल के गार्ड्स ही उसे धक्का देते हैं. फिर कार स्टार्ट हो जाती है और मॉल परिसर से निकल जाती है.
लड़की ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह मुख्य अभियुक्त को पहले से जानती थी. इसके पहले भी एकाध दफ़े उससे सामना हो चुका था. मुख्य अभियुक्त ने एक बार उससे प्रेम का इज़हार भी किया था. बाक़ी अभियुक्तों को वह नहीं जानती.
पुलिस की जांच में पता चला है कि चारों अभियुक्त दोस्त हैं. चूँकि लड़की को वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई है. इसलिए पुलिस अभियुक्तों के सोशल मीडिया अकाउंट को भी खंगाल रही है.
पटना मे् पिछले एक महीने में लड़की को अग़वा कर रेप करने यह दूसरी घटना है. थोड़े ही दिनों पहले बीएन कॉलेज की एक छात्रा से रेप का मामला सुर्खियों में था.
इस वक्त बिहार की राजनीति में भी बढ़ रहे अपराध का मुद्दा गरमाया हुआ है. सत्ताधारी पार्टी जदयू अपने चुनावी कैंपेन में पोस्टरों के जरिए बिहार के अपराध को नीतीश कुमार के 15 सालों के शासन और लालू यादव के 15 सालों के शासन को दिखा रही है.
वहीं विपक्ष पिछले कई महीनों से बिहार बढ़ रहे अपराध के मामलों पर ही सरकार को घेर रही है. लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा सबसे अधिक सवालों की घेरे में है.
पटना के सीनियर क्राइम रिपोर्टर शशि सागर कहते हैं, "पूरे शहर की सुरक्षा सवालों में है. दिनदहाड़े लूट हो रही है. वो भी हर दिन. ना कहीं पुलिस दिखती है और ना कहीं उसकी मॉनिटरिंग. पुलिस की तीसरी आंख जिसको सीसीटीवी कैमरा माना जाता है, उसका पूरा सिस्टम बर्बाद हो चुका है. पटना पुलिस की रिपोर्ट है कि शहर को कम के कम एक हज़ार कैमरों की जरूरत है. लगे हैं केवल 180. उनमें से भी 100 ख़राब है. और ये सारी बात अपराधियों को पता है."
शशि आगे कहते हैं, "दरअसल यहां की पुलिस ओवर कॉन्फिडेंस में चल रही है. उसको पता है कि सरकार ही सुशासन के नाम पर चल रही है. सवाल तो नीतीश कुमार से पूछे जाने चाहिए जिन्होंने ऐसे बयान देकर कि पटना में लड़कियां रात को भी डाकबंगला और बोरिंग रोड चौराहे पर आइसक्रीम खाती हुई मिल जाएंगी, पुलिस को बेवजह का क्रेडिट दे चुके हैं."
घटना पर राजनीतिक बयानबाज़ियां शुरू हो गई हैं. पटना साहिब के सांसद और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का घर बोरिंग रोड चौराहे के क़रीब ही है. उन्होंने ऐसे जघन्य कृत्य पर दुख जताया है. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
पटना के पुलिस कप्तान हाल ही में बदल कर आए हैं. नए एसएससपी उपेंद्र कुमार शर्मा मंगलवार देर शाम तक घटनास्थल जीवी मॉल में जांच पड़ताल करते दिखे. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अभियुक्तों को पहचानने का काम चल रहा था.
एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने बीबीसी को बताया कि "अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर छापेमारी चल रही है. जल्द ही पुलिस की पकड़ में आ जाएंगे. लड़की की शिकायत के आधार पर हमने कार्रवाई की है. मेडिकल रिपोर्ट आने पर स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी."
वे उसे कार में बिठाकर एक फ्लैट पर ले गए, उसके साथ दुष्कर्म किया, वीडियो बनाया और बाहर बोलने पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर छोड़ दिया.
यह बातें पटना महिला थाने में एक एफ़आईआर रिपोर्ट में दर्ज है. रिपोर्ट के अनुसार लड़की ने यह भी कहा है कि वह किसी तरह जान बचाकर लड़कों के चंगुल से निकल सकी. हॉस्टल आकर अपनी बहन को सारी कहानी सुनाई, फिर दोनों ने साहस करके मुक़दमा दर्ज कराने का फ़ैसला किया.
पटना पुलिस ने लड़की की मेडिकल जांच कराई है. रिपोर्ट आने का इंतज़ार है. अभी तक की कार्रवाई में पुलिस ने चार में से दो लड़कों को गिरफ़्तार किया है. उनसे पूछताछ के आधार पर बाक़ी के बचे दोनों मुख्य अभियुक्तों की गिरफ़्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है.
बीबीसी को पटना की महिला थाना प्रभारी आरती जायसवाल ने बताया, "लड़की की शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 376 डी, 323 और 27 आर्म्स एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है. जिन दो अभियुक्तों की गिरफ्तारी हुई है, उनसे पुलिस को अहम सुराग हाथ लगे हैं. सीसीटीवी फुटेज और कॉल लोकेशन के आधार पर उन तक पहुंचने की कोशिशें चल चल रही हैं."
एफ़आईआर रिपोर्ट में जिस जगह से लड़की को अगवा करने की बात दर्ज है उसे शहर का दिल कहा जाता है. शहर के बीचों-बीच स्थित पटना का बोरिंग रोड चौराहा.
लड़की ने शिकायत पत्र में कहा है कि वह बोरिंग रोड स्थित जीवी मॉल के एक रेस्टोरेंट में खाने के लिए गई थी. मुख्य अभियुक्तों में से एक वहां पहुंचता है. उन्हें अपने साथ चलने के लिए कहता है. लड़की मना कर देती है. वहां लड़के से उनकी बहस होती है. वह बिना खाए रेस्टोरेंट से निकल गई. लड़का उसके पीछे -पीछे चला आता है. बाहर निकलने पर पिस्टल सटा कर सामने खड़ी गाड़ी में बैठ जाने को कहता है.
पुलिस को जो सीसीटीवी फुटेज मिले हैं उसमें भी रात के अंधेरे के धुंधलके में दिखता है कि तीन लड़के और लड़की एक गाड़ी में बैठते हैं. एक लड़का लड़की के एकदम क़रीब है. एक और लड़का पहले से कार की ड्राइविंग सीट पर बैठा रहता है.
सीसीटीवी फुटेज में यह भी दिखता है कि सबके बैठ जाने के बाद भी कार स्टार्ट नहीं होती है. मॉल के गार्ड्स ही उसे धक्का देते हैं. फिर कार स्टार्ट हो जाती है और मॉल परिसर से निकल जाती है.
लड़की ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह मुख्य अभियुक्त को पहले से जानती थी. इसके पहले भी एकाध दफ़े उससे सामना हो चुका था. मुख्य अभियुक्त ने एक बार उससे प्रेम का इज़हार भी किया था. बाक़ी अभियुक्तों को वह नहीं जानती.
पुलिस की जांच में पता चला है कि चारों अभियुक्त दोस्त हैं. चूँकि लड़की को वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई है. इसलिए पुलिस अभियुक्तों के सोशल मीडिया अकाउंट को भी खंगाल रही है.
पटना मे् पिछले एक महीने में लड़की को अग़वा कर रेप करने यह दूसरी घटना है. थोड़े ही दिनों पहले बीएन कॉलेज की एक छात्रा से रेप का मामला सुर्खियों में था.
इस वक्त बिहार की राजनीति में भी बढ़ रहे अपराध का मुद्दा गरमाया हुआ है. सत्ताधारी पार्टी जदयू अपने चुनावी कैंपेन में पोस्टरों के जरिए बिहार के अपराध को नीतीश कुमार के 15 सालों के शासन और लालू यादव के 15 सालों के शासन को दिखा रही है.
वहीं विपक्ष पिछले कई महीनों से बिहार बढ़ रहे अपराध के मामलों पर ही सरकार को घेर रही है. लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा सबसे अधिक सवालों की घेरे में है.
पटना के सीनियर क्राइम रिपोर्टर शशि सागर कहते हैं, "पूरे शहर की सुरक्षा सवालों में है. दिनदहाड़े लूट हो रही है. वो भी हर दिन. ना कहीं पुलिस दिखती है और ना कहीं उसकी मॉनिटरिंग. पुलिस की तीसरी आंख जिसको सीसीटीवी कैमरा माना जाता है, उसका पूरा सिस्टम बर्बाद हो चुका है. पटना पुलिस की रिपोर्ट है कि शहर को कम के कम एक हज़ार कैमरों की जरूरत है. लगे हैं केवल 180. उनमें से भी 100 ख़राब है. और ये सारी बात अपराधियों को पता है."
शशि आगे कहते हैं, "दरअसल यहां की पुलिस ओवर कॉन्फिडेंस में चल रही है. उसको पता है कि सरकार ही सुशासन के नाम पर चल रही है. सवाल तो नीतीश कुमार से पूछे जाने चाहिए जिन्होंने ऐसे बयान देकर कि पटना में लड़कियां रात को भी डाकबंगला और बोरिंग रोड चौराहे पर आइसक्रीम खाती हुई मिल जाएंगी, पुलिस को बेवजह का क्रेडिट दे चुके हैं."
घटना पर राजनीतिक बयानबाज़ियां शुरू हो गई हैं. पटना साहिब के सांसद और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद का घर बोरिंग रोड चौराहे के क़रीब ही है. उन्होंने ऐसे जघन्य कृत्य पर दुख जताया है. दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की है.
पटना के पुलिस कप्तान हाल ही में बदल कर आए हैं. नए एसएससपी उपेंद्र कुमार शर्मा मंगलवार देर शाम तक घटनास्थल जीवी मॉल में जांच पड़ताल करते दिखे. सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अभियुक्तों को पहचानने का काम चल रहा था.
एसएसपी उपेंद्र शर्मा ने बीबीसी को बताया कि "अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए कई जगहों पर छापेमारी चल रही है. जल्द ही पुलिस की पकड़ में आ जाएंगे. लड़की की शिकायत के आधार पर हमने कार्रवाई की है. मेडिकल रिपोर्ट आने पर स्थिति और स्पष्ट हो पाएगी."
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