Friday, May 31, 2019

医源性感染案例频发暴露未遵守制度 卫健委要求杜绝

  医院管理者要提高对感染控制工作重要性的认识,强化责任意识,落实制度要求,健全院内感染防控制度。突出院内感染防控工作重点,做好重点科室感染控制工作,建立健全院内感染监测制度,及时评估,降低潜在感染风险。

  □ 本报记者 侯建斌

  这几天,江苏东台成为关注焦点。69名血透患者被确认丙肝病毒感染,让东台市人民医院站到了风口浪尖。

  官方通报称这起事件是由于医护人员手部卫生消毒、透析时所使用的相关设备消毒以及透析区域消毒措施执行不规范造成的。

  《法制日报》记者注意到,这类典型案例背后折射出的医疗机构感控领域的薄弱环节,早就引起国家卫生健康委的高度重视。

  就在5月23日,国家卫生健康委办公厅发布《关于进一步加强医疗机构感染预防与控制工作的通知》(以下简称《通知》),同时印发《医疗机构感染预防与控制基本制度(试行)》(以下简称《感控制度》),要求各地医疗机构采取有力措施,预防和控制感染性疾病传播,杜绝医源性感染发生,防范化解感染暴发风险。

  专家认为,做好感控工作是保障医疗质量和医疗安全的底线要求,是医疗机构开展诊疗活动中必须履行的基本职责。《通知》明晰了各级各类医疗机构要履行主体责任,对进一步加强医疗机构感染预防与控制,保障医疗安全,维护人民群众身体健康与生命安全,具有重要意义。

  已有制度未被严格遵守

  5月13日,东台市人民医院发现一例丙肝抗体阳性病人,随后院方对在院进行血液透析治疗的161名患者进行筛查。经筛查发现,有69人感染丙肝病毒。

  经国家卫健委、江苏省卫健委和东台市卫健委组成的专家组调查认定,这次事件是因医院院内感染管理制度落实不到位等原因引起。

  包括盐城市卫健委、东台市卫健委、东台市人民医院的16名相关责任人被严肃问责,但这并非该案的终点——东台市人民医院已被责令针对存在问题,限期整改到位。同时,针对东山医院感染管理为何层层失守的追问也还在继续。

  记者通过网络公开查询发现,类似的事件不在少数,近年来各地已发生多起医院感染丙肝的相关案例。

  2016年2月,陕西镇安县医院发现血透患者丙肝病毒感染,最终确认26人被感染;2013年,辽宁省丹东东港市医疗保险门诊部发生群体性丙肝感染事件,有99人确诊感染丙肝病毒。

  当然,医源性感染案例还不止是丙肝病毒,感染艾滋病、新生儿感染等病例悉数在列。

  2017年1月,浙江省中医院一名技术人员违反“一人一管一抛弃”操作规程,在操作中重复使用吸管造成交叉污染,最终导致5名治疗者感染艾滋病病毒。

  本月12日,南方医科大学顺德医院也发生一起由肠道病毒引起、因管理不善造成的新生儿感染事件,造成5例患有新生儿肺炎等基础疾病的患儿死亡。

  近年来医源性感染案例频频发生,其背后有哪些问题值得反思?在北京中医药大学法律系医药卫生法学副教授邓勇看来,一方面可以看出医院管理者对感染防治工作重视程度不足,管控工作不到位,缺乏预防感染的安全管理措施;另一方面暴露出人才队伍参差不齐,医院感染专业知识培训不足的问题。

  “医务工作者和院内工作人员对医院感染认识不足,预防医源性感染意识差。”邓勇举例说,在操作中不严格执行操作程序和规范,操作时不戴手套、帽子及口罩,检测后随意处置标本,不及时消毒受污染的台面地面等时有发生。

  邓勇告诉记者,医院感染涉及实验室标准操作程序、标本管理制度、消毒及清洁制度、实验室人员的出入制度、医疗废物的处理等制度,环节众多,控制难度大。

  “尽管这些制度很难说没有漏洞,但有关医源性感染预防的要求十分明确的。”中国卫生法学会法律事务中心主任王维嘉同样认为,医源性感染案例多发的原因多样,归根结底是有关人员未能严格遵守现有的各项医疗制度。

  应当建立全员培训制度

  《通知》要求,对感染性疾病病例较多,易发生人间传播,特别是易发生医源性感染的科室,要重点关注并加强管理。尤其要针对新生儿病房、新生儿重症监护室、重症医学科、器官(骨髓)移植病房、血液透析中心(室)、感染性疾病科、手术室、产房、急诊科、口腔科、介入手术室、输血科、内镜室、消毒供应中心等重点部门和科室的特点,制订并落实具体防控措施。

  与此同时,医疗机构要加强对重点科室的主动监测,对侵入性操作环节(例如手术治疗、中心静脉插管、留置导尿管、呼吸机辅助呼吸、透析治疗、内镜操作等)实现全覆盖。

  这一次,感控人才队伍建设被提到了新的高度。根据《通知》要求,各地医疗机构要加强感控人才队伍建设,确保感控专(兼)职人员配备充足,感控队伍专业结构合理,健全感控人员职业发展路径和激励机制,加大投入倾斜力度,保持感控队伍的稳定性。

  《通知》还提出,地方各级卫生健康行政部门和各级各类医疗机构要建立感控全员培训制度,制订培训大纲和培训计划,每年至少开展1次感控法律法规、知识和技能专项培训。

  在培训对象上,覆盖全体医务人员以及医疗机构的管理、后勤(包括外包服务)等人员,培训内容针对不同岗位特点设定,并组织培训效果考核。

  将参加培训情况以及考核结果作为重要内容,纳入医师定期考核、护士执业注册、药学、医技以及其他人员档案管理等,并与职称晋升、绩效分配、评优评先等挂钩

  在邓勇看来,建立感控全员培训制度,加强医院感染专业知识培训,有利于全面提升医务工作者和院内工作人员对医院感染防控认识,提升预防医源性感染水平。

  邓勇认为,《通知》提出的建立多学科、多部门协作机制,形成合力共同开展感控,这对于真正破解感控薄弱环节意义重大。

  《通知》还将感控工作作为“一票否决”项纳入医疗机构等级评审、绩效考核、评优评先等工作。邓勇说,这一举措意在促进感控水平的不断提升。

  加强感染预防体系建设

  与《通知》一起印发的是《感控制度》,卫健委要求各地要依照《医疗机构感染预防与控制基本制度(试行)》,根据本机构实际情况,细化具体制度措施,加强全过程管理。

  这份文件不仅对感控分级管理制度、感控监测及报告管理制度、感控标准预防措施执行管理制度、感控风险评估制度、侵入性器械/操作相关感染防控制度、医疗机构内传染病相关感染预防与控制制度等内容作了精确定义,而且提出翔实具体的要求。

  其中,《感控制度》要求建立医疗机构内感染暴发报告责任制,制订并执行感染监测以及感染暴发的报告、调查与处置等规定、流程和应急预案。

  王维嘉认为,值得肯定的是,《感控制度》将抗生素的使用从建议性规定上升为强制性规定,而且突出医疗机构负责人或法定代表人对感染的直接责任。

  《感控制度》是各级各类医疗机构必须遵守和严格执行的基本要求,具有“底线性”“强制性”,同时也为医疗机构开展感控工作提出明确要求。邓勇告诉记者,“当下更重要的是如何让《感控制度》尽快落地,如何真正补齐感控领域的薄弱环节。”

  为此,邓勇指出:一方面,医院管理者要提高对感控工作重要性的认识,强化责任意识,落实感控制度要求,健全院内感染防控制度。另一方面,要突出院内感染防控工作重点,做好重点科室感控工作;建立健全院内感染监测制度,及时评估,降低潜在感染风险。

  此外,各地卫生行政管理部门要加强监督管理,督促《感控制度》各项要求有效落实,加大对违法违规行为的处罚。

  王维嘉认为,“规定的落地,有赖于对规定的宣传、贯彻,也有赖于各个医疗机构主要负责人的重视。”为此,他建议,各级卫生行政管理部门,不应只在有关感染事件发生后追责,更重要的是加强各级医疗机构感染预防体系的建设,并以预防制度体系建设促进有关规定的落实。

Thursday, May 23, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 नतीजे: वो 50 सीटें जिन पर है नज़र

11 अप्रैल से 19 मई तक 7 चरणों में लोकसभा की 542 सीटों के लिए चुनाव में कुल 8040 उम्मीदवार मैदान में उतरे और अब 17वीं लोकसभा के गठन के लिए 23 मई यानी गुरुवार को मतगणना हो रही है.

यानी आज 8040 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला होना है. चलिए देखते हैं कि कौन कौन से कद्दावर नेताओं की किस्मत का फ़ैसला होना है और इस चुनाव में किन-किन सीटों पर सबकी निगाहें टिकी हैं.

उत्तर प्रदेश
वाराणसी

नरेंद्र मोदी. 2014 में मोदी ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 3.3 लाख वोटों से हराया था. एक बार फिर नरेंद्र मोदी यहां से चुनाव मैदान में हैं और उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस के अजय राय और सपा-बसपा-रालोद की शालिनी यादव खड़ी हैं.

2014 में बीजेपी के राघव लखनपाल ने कांग्रेसी उम्मीदवार इमरान मसूद को हराया था. सहारनपुर में कुल 56.74 फीसदी हिंदू, 41.95 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या है. (2011 के जनगणना के अनुसार). इस लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें बेहट, सहारनपुर नगर, सहारनपुर, देवबंद और रामपुरमनिहारन आती हैं. इनमें से दो पर बीजेपी, दो कांग्रेस जबकि एक पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं. लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान सहारनपुर के देवबंद में ही 7 अप्रैल को बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन की पहली संयुक्त रैली का आयोजन किया गया था. पहली बार अखिलेश, मायावती और अजित सिंह ने मंच साझा किया. बीजेपी ने एक बार फिर राघव लखनपाल को उतारा है तो सपा-बसपा-रालोद ने हाजी फजर्लुरहमान और कांग्रेस ने इमरान मसूद को टिकट दिया है.

कैराना

2014 में यहां से बीजेपी की जीत हुई थी लेकिन बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुए इस सीट पर उप चुनाव में विपक्षी एकता के सहारे रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन की जीत हुई. 2019 के चुनाव में सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन की वजह से बीजेपी के लिए 2014 का प्रदर्शन फिर से दोहराना एक बड़ी चुनौती है. सपा-बसपा-रालोद की वर्तमान सांसद तबस्सुम हसन के सामने बीजेपी ने यहां से प्रदीप चौधरी को तो कांग्रेस ने हरेंद्र मलिक को उतारा है.

बाग़पत

भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, आरएलडी से जयंत चौधरी जबकि, शिवपाल सिंह यादव की पार्टी ने चौधरी मोहम्मद मोहकम को अपना प्रत्याशी बनाया है.

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की इस संसदीय सीट से उनके बेटे अजित सिंह कई बार चुनाव जीत चुके हैं लेकिन 2014 की मोदी लहर में बीजेपी ने यहां जीत का परचम लहराया और मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह सांसद चुने गए जबकि अजित सिंह तीसरे नंबर पर रहे.

इस बार यहां से उनके बेटे जयंत सिंह प्रत्याशी हैं जबकि खुद अजित सिंह मुज़फ़्फ़रनगर से चुनाव मैदान में हैं. अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी यहां से सपा-बसपा-रालोद के प्रत्याशी हैं. वहीं बीजेपी ने एक बार फिर सत्यपाल सिंह को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने कोई भी प्रत्याशी नहीं उतारे हैं.

2008 में अस्तित्‍व में आई गाज़ियाबाद सीट पर 2009 से ही बीजेपी का वर्चस्व बना हुआ है. यहां से जनरल विजय कुमार सिंह वर्तमान बीजेपी सांसद हैं.

2014 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर को 5.57 लाख वोटों से हराया था. सिंह को मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री बनाया गया. सिंह एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी हैं जबकि कांग्रेस की तरफ से डॉली शर्मा मैदान में हैं.

गौतमबुद्ध नगर

यह सीट भी 2008 में ही परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. 2015 में दादरी क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में हुई मोहम्मद अख़लाक़ की हत्या मामले को लेकर यह लोकसभा सीट चर्चा में रही है. 2009 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए जिसमें बसपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की.

यहां से वर्तमान में सांसद बीजेपी के डॉ महेश शर्मा हैं. इस बार यहां से महागठबंधन से बीएसपी प्रत्याशी सतवीर नागर और कांग्रेस के डॉ. अरविंद कुमार सिंह मैदान में हैं.

इस सीट पर गुर्जर वोटरों की संख्या अधिक है. यहां से बीजेपी की तरफ से एक बार फिर डॉ. महेश शर्मा मैदान में हैं जबकि सपा-बसपा-रालोद के प्रत्याशी सतवीर नागर और कांग्रेस की तरफ से डॉ. अरविंद कुमार सिंह मैदान में हैं.

2014 के आम चुनाव में हेमा मालिनी यहां से बीजेपी सांसद बनी थीं. उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी को हराया था.

हेमा मालिनी एक बार फिर मैदान में हैं और इस बार सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने यहां से बीजेपी को रोकने के लिए कुंवर नरेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस ने महेश पाठक को उतारा है.

बरेली लोकसभा सीट पर एक बार फिर बीजेपी के संतोष कुमार गंगवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. उनका मुक़ाबला कांग्रेस के प्रवीण सिंह एरन और सपा के गठबंधन प्रत्याशी भगवत शरण गंगवार से है.

मुज़फ़्फ़रनगर

2014 में बीजेपी के संजीव कुमार बालियान बसपा के कादिर राणा को चार लाख वोटों से हराकर निर्वाचित हुए थे. इस बार यहां से राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष अजित सिंह यहां से मैदान में है और बीजेपी ने एक बार फिर संजीव बालियान पर भरोसा जताया है. कांग्रेस ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है. मुज़फ़्फ़रनगर लोकसभा सीट 2013 के दंगों के कारण काफी चर्चा में रहा है. यहां लगभग 16.5 लाख मतदाता हैं. जिसमें मुसलमानों के वोट 5 लाख, जाटों के डेढ़ लाख और जाटवों के ढाई लाख वोट हैं.

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह यहां से मौजूदा सांसद हैं और इस बार भी बीजेपी से उम्मीदवार हैं. उनके सामने सपा-बसपा गठबंधन ने फ़िल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को टिकट दिया जो पहली बार चुनाव लड़ रही हैं.

बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि उनका किसी से मुक़ाबला नहीं है और वो इस चुनाव को बड़ी आसानी से जीत रही हैं. कांग्रेस पार्टी ने आचार्य प्रमोद कृष्णन को उतारा है.

उन्नाव

उन्नाव लोकसभा सीट से बीजेपी के साक्षी महाराज वर्तमान सांसद हैं. 2017 में यहां की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर बीजेपी का कब्जा रहा था जबकि एक सीट पर बसपा प्रत्याशी को जीत मिली थी. हालांकि 2004 में बसपा और 2009 में कांग्रेस यहां जीत दर्ज कर चुकी हैं.

2004 से इस सीट पर राहुल गांधी सांसद रहे हैं. इससे पहले भी यह सीट (दो बार छोड़ कर) कांग्रेस के ही खाते में रही है.

2014 में यहां से बीजेपी ने स्मृति ईरानी को उतार कर मुक़ाबला दिलचस्प बना दिया था और उन्हें तीन लाख वोट भी पड़े थे. इस बार भी स्मृति ईरानी मैदान में हैं और गठबंधन ने यहां से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है. यानी इन दोनों प्रत्याशियों के बीच सीधा मुक़ाबला है.

Friday, May 10, 2019

Теракт на Лондонском мосту. В суде восстановили хронологию событий

В Лондоне начались судебные слушания по делу о теракте на Лондонском мосту 3 июня 2017 года. Тем вечером взятый в аренду фургон въехал в толпу шедших по мосту, затем оттуда вышли трое и напали на прохожих с ножами. Погибли восемь человек; трое нападавших убиты полицией. В ходе судебных слушаний полиция впервые подробно рассказала о деталях произошедшего и об обстоятельствах гибели людей.

Летом 2017 года в Великобритании действовал повышенный уровень опасности: в марте того года одиночка напал с ножом на граждан в районе Вестминстера, убил пятерых человек и сам был застрелен полицией. 22 мая на "Манчестер-Арене" во время концерта Арианы Гранде смертник подорвал себя, в результате чего погибли 22 человека. Ответственность за обе атаки взяла на себя запрещенная в России экстремистская группировка "Исламское государство".

Выходцы из Марокко, 30-летний Рашид Редуан и 22-летний Юсеф Загба, а также гражданин Великобритании пакистанского происхождения, 27-летний Хурам Батт не попали в поле зрения полиции, потому что при подготовке к нападению не пытались совершить ничего противозаконного. 3 июня утром они арендовали минивэн; ножи с керамическими лезвиями и розовыми ручками они купили в обычном супермаркете сети Lidl.

3 июня около 22:00 они заехали на Лондонский мост; дальнейшее главный коронер Англии и Уэльса Марк Лакрафт описал в суде как "крайне ужасную драму".

Фургон проехал по мосту, через несколько минут камеры наблюдения зафиксировали, что он движется в обратном направлении. Он заехал на тротуар и на скорости врезался в толпу туристов. Трое в фальшивых поясах смертников выбежали из фургона, размахивая ножами и нанося ими удары. Они бежали в сторону Боро-маркета, популярного в городе рынка, где продают в том числе уличную еду. Сам рынок в это время не работал, но вокруг него были десятки ресторанов и пабов. Была суббота, и все они были переполнены.

Согласно представленной в суде реконструкции событий, атака продолжалась несколько минут, и остановить ее смогли в том числе прохожие.

Фургон "Рено" въехал на тротуар и сбил французского туриста Ксавье Тома, который в момент нападения разговаривал с сыном по мобильному телефону, и его подругу Кристин Делкро. Они приехали в Лондон из Парижа на выходные. Делкро сказала в суде, что у нее были "очень плохие предчувствия" из-за предыдущих атак в Англии, но она решилась на поездку, чтобы не огорчать Тома.

Сильный удар выбросил Тома в Темзу, его тело смогли найти только через несколько дней. Делкро попала под колеса машины, но выжила.

В этот момент под колесами минивэна погибла 30-летняя гражданка Канады Кристина Арчибальд. Она и ее жених Тайлер Фергюсон ехали на метро и решили выйти на станции London Bridge - прогуляться. Фергюсон потом сказал в суде, что за несколько секунд до случившегося на мосту невеста взяла его за руку, остановила и целовала несколько секунд.

Сразу несколько полицейских в суде заявили, что Ксавье Тома и Кристина Арчибальд могли бы выжить, если бы бордюр на Лондонском мосту был выше - и не позволял заехать автомобилю на пешеходную часть. Такой бордюр власти обещали установить после схожей атаки на Вестминстерском мосту в марте.

Нападавшие выбежали из остановившегося фургона. Хурам Батт в футболке лондонского "Арсенала" нанес несколько смертельных ранений учившейся в Лондоне австралийской студентке Саре Железняк.

На нападавших бросился работавший в Лондоне французский повар Себастьен Беланже, но его атаковали все трое вышедших из фургона, вытеснили в угол и убили.

30-летняя медсестра из Австралии Кирсти Боден была в пабе под Лондонским мостом. Услышав крики, она побежала в сторону остановившегося фургона - "в ужасе от своей храбрости", рассказал в суде ее муж Джеймс Ходдер. Боден начала оказывать помощь 26-летнему французу Александру Пигару. Он был без сознания и умирал. Хурам Батт толкнул Боден и ударил ее в грудь ножом. Она побежала, попыталась скрыться в одном из переулков, но скончалась от потери крови.

Родственники Боден и Пегара 8 мая 2019 года обнимались и держались за руки в суде.

Убийцы бросились бежать с моста, у входа в паб один из них смертельно ранил 32-летнего британского бизнесмена Джеймса Макмаллана.

Испанский банкир Игнасио Эччевериа возвращался с прогулки на скейтборде и увидел, как нападавшие ранили и пытаются добить женщину. Он бросился на одного из них, несколько раз ударил скейтом, но в итоге сам был убит. В октябре 2018 года он был посмертно награжден медалью за спасение женщины и личный героизм.