Monday, April 1, 2019

टीएन शेषन: जो 'खाते थे राजनीतिज्ञों को नाश्ते में!'

दिसंबर 1990 की एक ठंडी रात करीब एक बजे केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी की सफ़ेद एम्बैसडर कार नई दिल्ली के पंडारा रोड के एक सरकारी घर के पोर्टिको में रुकी.

ये घर उस समय योजना आयोग के सदस्य टीएन शेषन का था. स्वामी बहुत बेतकल्लुफ़ी से शेषन के घर में घुसे.

वजह ये थी की साठ के दशक में स्वामी शेषन को हारवर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ा चुके थे.

हाँलाकि वो शेषन से उम्र में छोटे थे. उस ज़माने में सुब्रमण्यम स्वामी को हारवर्ड में जब भी दक्षिण भारतीय खाने की तलब लगती थी, वो शेषन के फ़्लैट में पहुंच जाते थे और शेषन उनका स्वागत दही चावल और रसम के साथ किया करते थे.

लेकिन उस दिन स्वामी शेषन के यहाँ इतनी देर रात न तो दही चावल खाने आए थे और न ही 'वट्टलकोड़ंबू.'

वो प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के दूत के तौर पर वहाँ पहुंचे थे और आते ही उन्होंने उनका संदेश दिया था, "क्या आप भारत का अगला मुख्य चुनाव आयुक्त बनना पसंद करेंगे?"

शेषन इस प्रस्ताव से बहुत अधिक उत्साहित नहीं हुए थे, क्योंकि एक दिन पहले ही कैबिनेट सचिव विनोद पांडे ने भी उन्हें ये प्रस्ताव दिया था.

और तब शेषन ने विनोद को टालते हुए कहा था, "विनोद तुम पागल तो नहीं हो गए? कौन जाना चाहेगा निर्वाचन सदन में?"

लेकिन जब स्वामी दो घंटे तक उन्हें ये पद स्वीकार करने के लिए मनाते रहे तो शेषन ने उनसे कहा कि वो कुछ लोगों से परामर्श करने के बाद अपनी स्वीकृति देंगे.

टीएन शेषन की जीवनी 'शेषन- एन इंटिमेट स्टोरी' लिखने वाले वरिष्ठ पत्रकार के गोविंदन कुट्टी बताते हैं, "स्वामी के जाने के बाद शेषन ने राजीव गाँधी को फ़ोन मिला कर कहा कि वो तुरंत उनसे मिलने आना चाहते हैं. जब वो उनके यहाँ पहुंचे तो राजीव गाँधी अपने ड्रॉइंग रूम में थोड़ी उत्सुकता के साथ उनका इंतज़ार कर रहे थे."

"शेषन ने उनसे सिर्फ़ पाँच मिनट का समय लिया था, लेकिन बहुत जल्दी ही ये समय बीत गया. राजीव ने ज़ोर से आवाज़ लगाई, 'फ़ैट मैन इज़ हियर.' क्या आप हमारे लिए कुछ 'चॉकलेट्स' भिजवा सकते हैं? 'चॉकलेट्स' शेषन और राजीव दोनों की कमज़ोरी थी."

"थोड़ी देर बाद राजीव गांधी ने शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त का पद स्वीकार करने के लिए अपनी सहमति दे दी. लेकिन वो इससे बहुत खुश नहीं थे. जब वो शेषन को दरवाज़े तक छोड़ने आए तो उन्होंने उन्हें छेड़ते हुए कहा कि वो दाढ़ी वाला शख़्स उस दिन को कोसेगा, जिस दिन उसने तुम्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बनाने का फ़ैसला किया था."

दाढ़ी वाले शख़्स से राजीव गांधी का मतलब प्रधानमंत्री चंद्रशेखर से था.

टीएन शेषन के राजीव गाँधी के करीब आने की भी एक दिलचस्प कहानी है.

वो पहले वन और फिर पर्यावरण मंत्रालय में सचिव थे. वहाँ उन्होंने इतना अच्छा काम किया कि राजीव ने उन्हें आंतरिक सुरक्षा मंत्रालय के अंतर्गत सुरक्षा सचिव बना दिया.

के गोविंदन कुट्टी बताते हैं, "सुरक्षा सचिव के रूप में शेषन सचिव से कहीं बड़ा काम करने लगे. वो खुद सुरक्षा विशेषज्ञ बन गए. एक बार उन्होंने राजीव गाँधी के मुंह से ये कहते हुए बिस्किट खींच लिया कि प्रधानमंत्री को वो कोई चीज़ नहीं खानी चाहिए, जिसका पहले परीक्षण न किया गया हो."

गोविंदन कुट्टी आगे बताते हैं, "एक बार 15 अगस्त को राजीव गाँधी बहुत से लोगों के साथ विजय चौक से इंडिया गेट तक दौड़ने वाले थे. उन्होंने ट्रैक सूट पहन रखा था. थोड़ी दूरी पर टीएन शेषन बंद गले के सूट और पतलून में सारा इंतज़ाम देख रहे थे."

"राजीव ने उन्हें देख कर मज़ाक किया, 'आप वहाँ क्या सूटबूट पहने खड़े हैं? आइए आप भी हमारे साथ दौड़िए. आपका मोटापा थोड़ा कम हो जाएगा.' शेषन ने तपाक से जवाब दिया, 'कुछ लोगों को सीधे खड़ा होना पड़ता है, ताकि देश का प्रधानमंत्री दौड़ सके.'"

"थोड़ी देर बाद वो हुआ, जिसकी राजीव गाँधी को बिलकुल उम्मीद नहीं थी. अभी वो कुछ ही मिनट दौड़े होंगे कि सुरक्षाकर्मी उनके चारों तरफ़ घेरा बनाते हुए उन्हें एक ऐसी जगह ले आए, जहाँ एक कार खड़ी हुई थी और जिसका इंजन पहले से चालू था."

"उन्होंने राजीव को कार में बैठाया और ये जा... वो जा. एक मिनट में उन्होंने उनको उनके घर पहुंचा दिया. ऐसा करते हुए सुरक्षाकर्मी राजीव से नज़रे नहीं मिला पा रहे थे. लेकिन उन्हें पता था कि उन्हें करना क्या है. शेषन का उन्हें निर्देश था कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए."

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