Thursday, May 23, 2019

लोकसभा चुनाव 2019 नतीजे: वो 50 सीटें जिन पर है नज़र

11 अप्रैल से 19 मई तक 7 चरणों में लोकसभा की 542 सीटों के लिए चुनाव में कुल 8040 उम्मीदवार मैदान में उतरे और अब 17वीं लोकसभा के गठन के लिए 23 मई यानी गुरुवार को मतगणना हो रही है.

यानी आज 8040 उम्मीदवारों की किस्मत का फ़ैसला होना है. चलिए देखते हैं कि कौन कौन से कद्दावर नेताओं की किस्मत का फ़ैसला होना है और इस चुनाव में किन-किन सीटों पर सबकी निगाहें टिकी हैं.

उत्तर प्रदेश
वाराणसी

नरेंद्र मोदी. 2014 में मोदी ने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल को 3.3 लाख वोटों से हराया था. एक बार फिर नरेंद्र मोदी यहां से चुनाव मैदान में हैं और उनके ख़िलाफ़ कांग्रेस के अजय राय और सपा-बसपा-रालोद की शालिनी यादव खड़ी हैं.

2014 में बीजेपी के राघव लखनपाल ने कांग्रेसी उम्मीदवार इमरान मसूद को हराया था. सहारनपुर में कुल 56.74 फीसदी हिंदू, 41.95 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या है. (2011 के जनगणना के अनुसार). इस लोकसभा सीट के तहत पांच विधानसभा सीटें बेहट, सहारनपुर नगर, सहारनपुर, देवबंद और रामपुरमनिहारन आती हैं. इनमें से दो पर बीजेपी, दो कांग्रेस जबकि एक पर समाजवादी पार्टी के विधायक हैं. लोकसभा चुनाव 2019 के दौरान सहारनपुर के देवबंद में ही 7 अप्रैल को बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल गठबंधन की पहली संयुक्त रैली का आयोजन किया गया था. पहली बार अखिलेश, मायावती और अजित सिंह ने मंच साझा किया. बीजेपी ने एक बार फिर राघव लखनपाल को उतारा है तो सपा-बसपा-रालोद ने हाजी फजर्लुरहमान और कांग्रेस ने इमरान मसूद को टिकट दिया है.

कैराना

2014 में यहां से बीजेपी की जीत हुई थी लेकिन बीजेपी सांसद हुकुम सिंह के निधन से खाली हुए इस सीट पर उप चुनाव में विपक्षी एकता के सहारे रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन की जीत हुई. 2019 के चुनाव में सपा-बसपा-रालोद के गठबंधन की वजह से बीजेपी के लिए 2014 का प्रदर्शन फिर से दोहराना एक बड़ी चुनौती है. सपा-बसपा-रालोद की वर्तमान सांसद तबस्सुम हसन के सामने बीजेपी ने यहां से प्रदीप चौधरी को तो कांग्रेस ने हरेंद्र मलिक को उतारा है.

बाग़पत

भारतीय जनता पार्टी की तरफ़ से मौजूदा सांसद सत्यपाल सिंह यहां से चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, आरएलडी से जयंत चौधरी जबकि, शिवपाल सिंह यादव की पार्टी ने चौधरी मोहम्मद मोहकम को अपना प्रत्याशी बनाया है.

देश के पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की इस संसदीय सीट से उनके बेटे अजित सिंह कई बार चुनाव जीत चुके हैं लेकिन 2014 की मोदी लहर में बीजेपी ने यहां जीत का परचम लहराया और मुंबई पुलिस के पूर्व कमिश्नर सत्यपाल सिंह सांसद चुने गए जबकि अजित सिंह तीसरे नंबर पर रहे.

इस बार यहां से उनके बेटे जयंत सिंह प्रत्याशी हैं जबकि खुद अजित सिंह मुज़फ़्फ़रनगर से चुनाव मैदान में हैं. अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी यहां से सपा-बसपा-रालोद के प्रत्याशी हैं. वहीं बीजेपी ने एक बार फिर सत्यपाल सिंह को टिकट दिया है जबकि कांग्रेस ने कोई भी प्रत्याशी नहीं उतारे हैं.

2008 में अस्तित्‍व में आई गाज़ियाबाद सीट पर 2009 से ही बीजेपी का वर्चस्व बना हुआ है. यहां से जनरल विजय कुमार सिंह वर्तमान बीजेपी सांसद हैं.

2014 में उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर को 5.57 लाख वोटों से हराया था. सिंह को मोदी कैबिनेट में राज्य मंत्री बनाया गया. सिंह एक बार फिर बीजेपी प्रत्याशी हैं जबकि कांग्रेस की तरफ से डॉली शर्मा मैदान में हैं.

गौतमबुद्ध नगर

यह सीट भी 2008 में ही परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई थी. 2015 में दादरी क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में हुई मोहम्मद अख़लाक़ की हत्या मामले को लेकर यह लोकसभा सीट चर्चा में रही है. 2009 में यहां पहली बार लोकसभा चुनाव हुए जिसमें बसपा ने बड़े अंतर से जीत दर्ज की.

यहां से वर्तमान में सांसद बीजेपी के डॉ महेश शर्मा हैं. इस बार यहां से महागठबंधन से बीएसपी प्रत्याशी सतवीर नागर और कांग्रेस के डॉ. अरविंद कुमार सिंह मैदान में हैं.

इस सीट पर गुर्जर वोटरों की संख्या अधिक है. यहां से बीजेपी की तरफ से एक बार फिर डॉ. महेश शर्मा मैदान में हैं जबकि सपा-बसपा-रालोद के प्रत्याशी सतवीर नागर और कांग्रेस की तरफ से डॉ. अरविंद कुमार सिंह मैदान में हैं.

2014 के आम चुनाव में हेमा मालिनी यहां से बीजेपी सांसद बनी थीं. उन्होंने राष्ट्रीय लोक दल प्रमुख अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी को हराया था.

हेमा मालिनी एक बार फिर मैदान में हैं और इस बार सपा-बसपा-रालोद गठबंधन ने यहां से बीजेपी को रोकने के लिए कुंवर नरेंद्र सिंह को मैदान में उतारा है. वहीं कांग्रेस ने महेश पाठक को उतारा है.

बरेली लोकसभा सीट पर एक बार फिर बीजेपी के संतोष कुमार गंगवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. उनका मुक़ाबला कांग्रेस के प्रवीण सिंह एरन और सपा के गठबंधन प्रत्याशी भगवत शरण गंगवार से है.

मुज़फ़्फ़रनगर

2014 में बीजेपी के संजीव कुमार बालियान बसपा के कादिर राणा को चार लाख वोटों से हराकर निर्वाचित हुए थे. इस बार यहां से राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष अजित सिंह यहां से मैदान में है और बीजेपी ने एक बार फिर संजीव बालियान पर भरोसा जताया है. कांग्रेस ने अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है. मुज़फ़्फ़रनगर लोकसभा सीट 2013 के दंगों के कारण काफी चर्चा में रहा है. यहां लगभग 16.5 लाख मतदाता हैं. जिसमें मुसलमानों के वोट 5 लाख, जाटों के डेढ़ लाख और जाटवों के ढाई लाख वोट हैं.

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह यहां से मौजूदा सांसद हैं और इस बार भी बीजेपी से उम्मीदवार हैं. उनके सामने सपा-बसपा गठबंधन ने फ़िल्म अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा की पत्नी पूनम सिन्हा को टिकट दिया जो पहली बार चुनाव लड़ रही हैं.

बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि उनका किसी से मुक़ाबला नहीं है और वो इस चुनाव को बड़ी आसानी से जीत रही हैं. कांग्रेस पार्टी ने आचार्य प्रमोद कृष्णन को उतारा है.

उन्नाव

उन्नाव लोकसभा सीट से बीजेपी के साक्षी महाराज वर्तमान सांसद हैं. 2017 में यहां की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर बीजेपी का कब्जा रहा था जबकि एक सीट पर बसपा प्रत्याशी को जीत मिली थी. हालांकि 2004 में बसपा और 2009 में कांग्रेस यहां जीत दर्ज कर चुकी हैं.

2004 से इस सीट पर राहुल गांधी सांसद रहे हैं. इससे पहले भी यह सीट (दो बार छोड़ कर) कांग्रेस के ही खाते में रही है.

2014 में यहां से बीजेपी ने स्मृति ईरानी को उतार कर मुक़ाबला दिलचस्प बना दिया था और उन्हें तीन लाख वोट भी पड़े थे. इस बार भी स्मृति ईरानी मैदान में हैं और गठबंधन ने यहां से अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है. यानी इन दोनों प्रत्याशियों के बीच सीधा मुक़ाबला है.

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